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जीवन मे खुशी चाहते हो तो ....

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जीवन मे खुशी चाहते हो तो,  बदलावों को सहजता से अपनाओ.. जीवन मे खुशी हर कोई चाहता है, हर किसी की चाहत होती है कि वो ताउम्र खुश रहे, खुशी को पाने के लिए हरएक प्रयास किये जाते है, लेकिन हम ज्यो-ज्यो हम खुशी पाने के करीब होते जाते है, त्यों-त्यों खुशी से दूरी बढ़ जाया करती है। वास्तव में हम जहाँ खुशी तलाश रहे होते है, या जिसे हम खुशी समझ रहे होते है वो वास्तव में भौतिक सुख होता है। हम भौतिक सुख के लिए आलीशान भवन तो बना लेते है, लेकिन एक अच्छा घर नही बना पाते। यहाँ भवन से तात्पर्य भौतिकता याने ईट-पत्थर से और घर का तात्पर्य रहने वाले सदस्यों के प्रति परस्पर प्रेम व भाईचारे से है। जब उम्र के साथ-साथ परिवार बढता है तो स्वाभाविक रूप से कई बदलाव होते है, जिम्मेदारियां में बदलाव आते है, अधिकारों में बदलाव आते है, कर्तव्य बदलते है। बस यही जगह है जहाँ अक्सर आमजन से चूक होती है, व्यक्ति समय के साथ अपने आप को बदलना नही चाहता, समय के साथ चलना नही चाहता, वो चाहता है वो जैसे पहले था वैसा ही आज भी रहे, समय के साथ कदमताल ना करने के कारण खुशी में धीरे-धीरे जहर घुलना प्रारम्भ होता है, और फिर खुशी की जगह ...

ज्ञान और घमंड

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जिन्हें ज्ञान है उन्हें  घमंड कैसा.. जिन्हें घमंड  है उन्हें ज्ञान कैसा .. ज्ञान और घमंड एक ही सिक्के के दो पहलू है। यदा कदा अल्पज्ञानी को अपने ज्ञान पर घमंड हो सकता है, लेकिन ज्ञानी (सर्वज्ञ) को घमंड  नही हो सकता। सर्वज्ञ ज्ञान के प्रकाश से घमंड का सर्वथा नाश हो जाता है। इसीलिए कहते है "जिन्हें ज्ञान है, उन्हें घमंड कैसा ..। और जिन्हें घमंड है, उन्हें ज्ञान कैसा ..। अल्पज्ञानी को अपने ज्ञान का घमंड तो होता है, लेकिन घमंड का ज्ञान कभी नही होता। जिस व्यक्ति को अपने घमंड का ज्ञान-भान ना हो वह ज्ञानी हो ही नही सकता, वह अल्पज्ञानी है। कई बार देखा जाता है कि अपने आप को ज्ञानी समझने वाले (अल्पज्ञानी)  इतना बोलते है कि सुनने वाले उस ज्ञानी के चुप होने का इंतजार करते है, और सर्वज्ञ ज्ञानी व्यक्ति सिर्फ इतना बोलते है कि सुनने वाले और कुछ सुनने का इंतजार करते रहते है।