जीवन मे खुशी चाहते हो तो ....
जीवन मे खुशी हर कोई चाहता है, हर किसी की चाहत होती है कि वो ताउम्र खुश रहे, खुशी को पाने के लिए हरएक प्रयास किये जाते है, लेकिन हम ज्यो-ज्यो हम खुशी पाने के करीब होते जाते है, त्यों-त्यों खुशी से दूरी बढ़ जाया करती है। वास्तव में हम जहाँ खुशी तलाश रहे होते है, या जिसे हम खुशी समझ रहे होते है वो वास्तव में भौतिक सुख होता है। हम भौतिक सुख के लिए आलीशान भवन तो बना लेते है, लेकिन एक अच्छा घर नही बना पाते। यहाँ भवन से तात्पर्य भौतिकता याने ईट-पत्थर से और घर का तात्पर्य रहने वाले सदस्यों के प्रति परस्पर प्रेम व भाईचारे से है। जब उम्र के साथ-साथ परिवार बढता है तो स्वाभाविक रूप से कई बदलाव होते है, जिम्मेदारियां में बदलाव आते है, अधिकारों में बदलाव आते है, कर्तव्य बदलते है। बस यही जगह है जहाँ अक्सर आमजन से चूक होती है, व्यक्ति समय के साथ अपने आप को बदलना नही चाहता, समय के साथ चलना नही चाहता, वो चाहता है वो जैसे पहले था वैसा ही आज भी रहे, समय के साथ कदमताल ना करने के कारण खुशी में धीरे-धीरे जहर घुलना प्रारम्भ होता है, और फिर खुशी की जगह दुःख प्राप्त करता है।
इसलिए बदलाओ के साथ अपने आप को भी सहजता से बदलना सिख लो ताकि खुशी आपसे दूर ना हो पाये।

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