पैरों में गिरने से अच्छा है, कुछ बनने की ठान ले ..

 

किसी और के पैरों में गिरने से अच्छा है, 
अपने पैरों पर चलकर कुछ बनने की ठान ले ....


        उक्त कथन प्रेरणा और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करता है I किसी से मदद की भीख मांगने या उसके अधीन होने से अच्छा है कि हम अपने दम पर, अपने पैरों पर खड़े हों जाये और अपने लक्ष्य को पाने के लिए संघर्ष करें। यह हमें आत्मसम्मान, आत्मविश्वास, और कठिनाइयों से जूझने की शक्ति प्रदान करता है। जब हम किसी और की मदद पर भरोसा करते हैं, तो हम अपनी क्षमता और संघर्ष की ताकत को अनदेखा कर देते हैं, और हमेशा किसी और से मदद की ओर देखते रहेंगे, साथ ही  यह हमें कमजोर बनाता है और हमारी आत्मनिर्भरता को खत्म कर पंगु बना देता है। इसके विपरीत, अगर हम अपने पैरों पर खड़े होकर अपने सपनों को, अपने लक्ष्य को  साकार करने की ठान लेते हैं, तो हमें कोई रोक नहीं सकता।
        मान लीजिए एक छात्र को पढ़ाई में कठिनाई हो रही है और उसे हर विषय में दूसरों की मदद की जरूरत पड़ रही है। यदि वह हमेशा अपने दोस्त या शिक्षक पर निर्भर रहता है, तो वह कभी भी स्वयं से पढ़ाई में महारत हासिल नहीं कर पाएगा। हर बार उसे दूसरों की मदद पर निर्भर रहना पड़ेगा। लेकिन अगर वह ठान लेता है कि वह स्वयं ही अपनी समस्याओं का हल निकालेगा, खुद मेहनत करेगा और विषय को समझेगा, तो न केवल वह आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि उसकी समझ और ज्ञान में भी वृद्धि होगी। यह आत्मविश्वास उसे जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी मदद करेगा।
        किसी भी व्यक्ति की सफलता के पीछे उसका संघर्ष, मेहनत, और आत्मविश्वास होता है। अगर हम इतिहास में झांकें, तो पाएंगे कि जितने भी सफल व्यक्ति हुए हैं, उन्होंने कभी दूसरों पर निर्भर रहकर सफलता प्राप्त नहीं की। उदाहरण के लिए, व्यापार क्षेत्र में धीरूभाई अंबानी, विज्ञान के क्षेत्र में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, राजनीति के क्षेत्र में नरेंद्र मोदी ने अपनी इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास. समर्पण और संघर्ष के माध्यम से उच्च शिखर तक का सफर तय किया जो की आमजन के लिए प्रेरणा का विषय है। इन सब ने जो ठाना वो कर के दिखाया। अगर ये दूसरो के भरोसे रहते, तो शायद ये कभी भी आज उच्च शिखर पर नही होते।
        जीवन में आत्मसम्मान बहुत महत्वपूर्ण है। यदि हम दूसरों पर निर्भर रहते हैं और उनके सामने झुकते हैं, तो हमारा आत्म-सम्मान खो जाता है। दूसरों की मदद लेना बुरी बात नहीं है, लेकिन हर बार दूसरों पर निर्भर रहना हमारे आत्मविश्वास को कमजोर करता है। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपने संघर्ष से खुद को मजबूत करें और अपने पैरों पर खड़े होकर सफलता प्राप्त करें।
        "किसी के पैरों में गिरने से अच्छा है, अपने पैरों पर चलकर कुछ बनने की ठान ले।" यह कथन हमें सिखाता है कि हमें जीवन में आत्मनिर्भर और आत्मसम्मान से भरा होना चाहिए। सफलता पाने का सबसे सही तरीका यही है कि हम अपने संघर्ष और मेहनत के बल पर अपने सपनों को साकार करें।

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