उपस्थिति नही, उपस्थित रहे !
उपस्तिथि नही उपस्थित रहे
दोस्तो, हम अक्सर अपनो के साथ उपस्थित होते है, मांगलिक सुअवसरों पर परिजनों, स्वजनों के साथ समारोह में उपस्थित होते है, हम कक्षा में उपस्थित रहते है, इस प्रकार के और भी कई उदाहरण हो सकते है। देखने मे आता है कि लोग, स्वजन, विद्यार्थी आदि उस जगह शारीरिक रूप से उपस्थित तो होते है, लेकिन मानसिक रूप से अनुपस्थित रहते है, यह स्तिथि ठीक नही है। हम जहाँ भी हो मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से उपस्थित रहे। वो चाहे मांगलिक आयोजन हो, कक्षा हो या कोई भी समारोह आदि। हमे चाहिए कि हम सुख या दुःख दोनों ही परिस्थिति में शारीरिक और मानसिक रूप से उपस्थित रहे।

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