अनुमान व अनुभव


अनुमान व अनुभव
 

         प्रायः हम अनुमान लगा कर किसी कार्य का श्रीगणेश कर देते है, लेकिन वो कार्य सही दिशा में होगा या नही, मनवांछित फल प्राप्त होंगे या नही, यह संदेह में होता है, क्योकि वो सिर्फ अनुमान से लिया गया निर्णय था। "अनुमान" कल्पना व भाव से आता है।

          जब कभी अनुभव के आधार पर किसी कार्य का प्रारम्भ किया जाता है, तो यह तय हो जाता है कि कार्यसिद्ध होगा ही, क्योंकि कार्य अनुभव के आधार पर किया गया था, और "अनुभव" प्रयोग व परीक्षा के बाद ही आता है।

          अतःएव कोई भी प्लानिग या किसी कार्य का शुभारंभ "अनुमान" के आधार पर ना करके "अनुभव" के आधार पर करना बेहतर होगा। यहाँ पर बात ये आएगी की पहले-पहल अनुभव कैसे आएगा जब तक कि कोई प्रयोग ना किये जावे। इसीलिये हमे अनुभवीयो के "अनुभव" से कार्य संपादित करना चाहिए। अनुभवी लोगो के अनुभव का लाभ उठाना चाहिए

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